संवाददाता महेश कश्यप।
अंबिकापुर (छत्तीसगढ़)। दिनांक 24/12/2023, सरगुजा संभाग के जिला अंबिकापुर ग्राम उदयपुर में कोल माइंस शुरू करने हसदेव के जंगलों में हजारों पेड़ों की कटाई के बाद आदिवासी समाज पर्यावरण प्रेमी हसदेव बचाने के लिए आंदोलन कर रहे।
पर्यावरण प्रेमियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा एक्स (TWITTER) प्लेटफार्म पर हसदेव को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। करीब लगभग लाखों कि संख्या में लोगों ने हसदेव के जंगल को बचाने के लिए ट्वीट किया है। इसके साथ ही यह लगातार जारी है और प्रकृति कि रक्षा करने के लिए आगे भी इसी तरह कि आंदोलन कर हसदेव को बचाएंगे।
दूसरी तरफ घाट बर्रा गांव के ग्रामीणों ने शिकायत की है कि करीब 93 हेक्टेयर जिस जंगल को उजाड़ा गया। उस जंगल के कुछ हिस्से की जमीन पर उनका कब्जा था। और वन अधिकार अधिनियम के तहत उन्हें पट्टा जारी नहीं किया गया। उस जमीन पर अब खदान खोला जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिना ग्रामसभा की अनुमति के जंगल नहीं उजड़ने देंगे। इसे लेकर ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए गांव में रैली निकाली। इस दौरान प्रदर्शन कर प्रशासन का दावा है कि घाटबर्रा के पेंड्रा मार जंगल में 90 हेक्टेयर में तीन दिनों तक 15307 पेड़ काटे गए हैं। वहीं आंदोलनकारियो का कहना है कि वन विभाग वास्तविक आकड़ा छिपा रहा है यहां इससे कई गुना अधिक पेड़ काटे गए हैं। बता दें कि पिछले साल भी माइंस के एक्सटेंशन के लिए 42 हेक्टेयर में लगे पेड़ काटे गए थे, तब भी विरोध हुआ था और कई लोगो के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। ग्रामीणों ने कहा कि जब एक साल पहले पेड़ कट रहे थे, नेता हमारे आंदोलन में साथ देने आते थे लेकिन अब भाजपा की सरकार बन गई। आदिवासी मुख्यमंत्री बन गए उसके बाद भी हम आदिवासियों की आवाज नहीं सुनी जा रही है बता दें कि वन विभाग द्वारा पेड़ों की कटाई के बाद अब कटे हुए पेड़ों के टुकड़े कर उनका लट्ठा बनाया जा रहा है। इसके बाद उन्हें वन विभाग के डिपो में भेजा जाएगा।
आपको बता दे कि छत्तीसगढ़ में आदिवासी मुख्यमंत्री पद का जैसे ही शपथ लिया उसी दिन से ही हसदेव अरण्य को काटने के लिए लोग भेजे गए है। हसदेव को बचाने के लिए आसपास के गांव वाले विरोध कर रहे है! लेकिन हजारों कि संख्या में पुलिस को तैनात किया गया है जिससे लगातार पेड़ो को काट लिया जा रहा है। जल है तो जीवन है उसी प्रकार जंगल है तो जीवन है जंगल से शुद्ध हवा मिलती है तभी स्वास्थ्य भी बनी रहेगी।