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आरएसएस के प्रचारकों द्वारा आदिवासियों को हिन्दू कहने के विरोध में पुतला दहन

संवाददाता अशोक मुंडा। 

रांची (झारखण्ड)। दिनांक 26/12/2023 मंगलवार को कांके रोड सरना समिति के बैनर तले मिसिर गोन्दा जतरा स्थल से कांके रोड सीएमपीडीआई के पास जनजाति सुरक्षा मंच के द्वारा विगत 24 दिसम्बर को मोराबादी में डीलिस्टिंग कार्यक्रम को लेकर 23.12.2023 को प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर प्रकृति पुजक आदिवासियों को राष्ट्रीय संयोजक सह पूर्व मंत्री गणेश राम भगत राष्ट्रीय सह संयोजक सह आरएसएस प्रचारक राजकिशोर हांसदा एवं भाजपा के पांडुरना विधानसभा के भाजपा प्रत्याशी प्रकाश सिंह उइके ने कहा की आदिवासी हिन्दू है। आदिवासी को धर्म कोड की कोई जरूरत नहीं है कहा गया था। 

इसी के विरोध में कांके रोड सरना समिति के पद्वाधिकारी एवं सदस्यों ने तीनों नेताओं का पुतला दहन किया। कांके रोड सरना समिति के संयोजक डब्लू मुंडा ने कहा आदिवासी देश का मूलवासी है। इसकी अपनी विशिष्ट संस्कृति, रूढ़ी प्रथा, बोली भाषा, रीति नीति, परंपरा, नेग नियम संस्कार है जो आदिम काल से पीढ़ी दर पीढ़ी आदिवासी समुदाय में जीवित है। आदिवासी प्रकृति को पूजता है आदिवासी पुरखा को पूजता है, आदिवासियो में मूर्ति पूजा को कोई स्थान नहीं, किसी भी धर्म ग्रंथ से आदिवासी संचालित नही होता, ऐसे में आदिवासी को हिंदू कहना आदिवासियो की धार्मिक भावना को ठेस पहूँचाने का काम भाजपा आरएसएस के द्वारा किया गया है। जिसका कांके रोड सरना समिति पुरजोर विरोध करती है।

बिरसा बिकास जनकल्याण समिति के अध्यक्ष अनिल उराँव ने कहा भारत देश एक पंथनिरपेक्ष राष्ट्र है तथा अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार सभी नागरिकों को प्राप्त है। यही भारत देश की खूबसूरती है कि विभिन्न धर्म पंथ के लोग आपसी सौहार्द बनाए हुए प्रेम भाव से रहते एवं सभी धर्मो का आदर सम्मान करते है। किंतु यदि किसी व्यक्ति विशेष या संगठन विशेष द्वारा आदिवासियों के धर्म को नकारा जायेगा या आदिवासियों के ऊपर किसी धर्म को थोपने जैसी बात कही जायेगी तो बर्दास्त नहीं किया जाऐगा।

मिसिर गोन्दा सरना प्रार्थना सभा के बसंती टोप्पो ने कहा की 2011 की जनगणना में करीब 70 लाख से अधिक ने मुख्य 6 धर्मो (हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन) को छोड़ अन्य के कॉलम में अपना जनजातीय धर्म को अंकित किया था। जिनमें सरना लिखने वालो की संख्या करीब 49 लाख इनमें सर्वाधिक थी। सभी जानते है कि जनजाति समूह एक धर्म कोड की मांग भी लंबे समय से कर रहा है। ऐसे में जनजातीय सुरक्षा मंच के एजेन्टों द्वारा प्रेस को दिए गए इंटरव्यू में यह कहा गया कि आदिवासी हिंदू है। आदिवासी जन्मजात हिंदू है। आदिवासी को धर्म कोड की कोई आवश्यकता नहीं है। ऐसे वक्तव्य से विभिन्न पुरखा धर्मो का पालन करने वाले आदिवासियों के आस्था के साथ खिलवाड़ है। पुतला दहन कार्यक्रम में मुख्य रूप से कांके रोड सरना समिति के सतीश खलखो, शशी मुण्डा, जीतराम मिंज, विकास तिर्की, मनोज केरकेट्टा, दीपक टोप्पो, अजीत तिर्की, बारह पड़हा जतरा समिति के अध्यक्ष कृष्णा उराँव, विक्की बान्डो, मिसिर गोन्दा प्रार्थना सभा के बसंती टोप्पो, रिंकी लकड़ा, फूलो टोप्पो, अनीता तिग्गा, झिरगी कच्छप, सधन मुण्डा, मुन्नी कुजूर इत्यादि सैकड़ो की संख्या में आदिवासी मौजूद थे।

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