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हुल झारखंड क्रांति दल के तत्वधान में बैठक

दुमका| झारखंड प्रदेश में सामाजिक न्याय के लिए आंदोलन करने वाला संगठन हुल झारखंड क्रांति दल के तत्वधान में दिनांक 10/05/2024 को बांदरजोड़ी में स्थित उनके मुख्य कार्यालय में मीटिंग बुलाई गई। मीटिंग की अध्यक्षता संगठन के कार्यालय सचिव सुभाष मुर्मू ने किया।

संताल परगना जिले में आदिवासी भूमि और उससे संबंधित विवादो का निपटारा रूढ़िगत ग्रामसभा के माध्यम से किया जाता है। लेकिन अनुसूचित जिलों में रूढ़िगत ग्रामसभा की अवहेलना और पार्टीवाद के विस्तारीकरण के कारण परंपरागत रूढ़िगत ग्रामसभा की मान्यता और उसका प्रभाव धीरे धीरे सामान्य शासन व्यवस्था द्वारा निष्क्रिय करने की पुरजोर कोशिश की जा रही है। पंचायती राज अधिनियम आदिवासी रूढ़िगत ग्रामसभा के लिए बहुत बड़ा अवरोधक है। अतः इस प्रकार के गैर न्यायिक और अनुचित गैर आदिवासी नीतियों के विरुद्ध हुल झारखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओ और पदाधिकारियों ने तत्काल बैठक का आह्वान कर अन्य विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों से जुड़े हुए लोगों को भी आमंत्रित किया और विभिन्न मुद्दों पर विचार भी व्यक्त किए गए। 

पाकुड़ ज़िला से आए एवं मानवाधिकार संगठन से जुड़े मुन्ना हेंब्रम ने आदिवासीयों के भूमि के संबंध में हो रही अनियमितता और गैर संवैधानिक तरीके से बाहरी कंपनियों द्वारा फर्जी ग्रामसभा के माध्यम से एसटी भूमि को खनन के लिए जिस तरीक़े से प्रयोग किया जा रहा है उसका खामियाजा वहां के स्थानीय आदिवासीयों को विस्थापित होकर इसका मूल्य चुकाना पड़ रहा है और इसका पुरा लाभ स्थानीय भूमि दलालों राजनीतिक एजेंटों और कंपनी को हो रहा है। अतः अनुसूचित क्षेत्रों में खुलआम मानवधिकार का हनन हो रहा है और स्थानीय सरकार इस कृत्य पर खामोश बैठी है। इसी क्रम में आंबेडकराईट पार्टी ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष राजू मुर्मू ने भी अपने विचार रखे। उन्होने कहा कि आज़ादी के इन छिहत्तर वर्षों के उपरांत भी अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले एसटी वर्गों की समस्याओं को किसी भी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों ने गंभीरता से नहीं लिया। झारखंड अलग राज्य निर्माण के 24 वर्षों के उपरांत भी झारखण्ड के एसटी एससी ओबीसी वर्गो की स्थिति ठीक नहीं है। अतः एपीआई को तीसरे विकल्प के रूप में लाने की जरूरत है ताकी झारखण्ड प्रदेश की वर्तमान समस्याओं का समाधान अपने अनुपम नीतियों के माध्यम से हो सके। राजू मुर्मू ने बताया की एपीआई की नीति स्थानीय लोगों को मध्यम अमीर बना सकता है तथा एसटी वर्गो के सभी संवैधानिक अधिकारों की रक्षा पार्लियामेंट के माध्यम से संभव है। तथा आदिवासियो की पहचान निश्चित कर उनके जल जंगल जमीन को संरक्षित करने में समर्थ होगा।


आज के मीटिंग में निम्नलिखित कार्यकर्ताओं और संगठन के पदाधिकारियों शामिल थे। पनेशल टुडू (सामाजिक सेवक), रूबीलाल सोरेन (सामाजिक सेवक), सुशील कुमार हेंब्रम (सदस्य हु. झा.क्रां.द ), बेटा सोरेन (सदस्य हु. झा.क्रां.द ), कमीशन बास्की (सदस्य हु. झा.क्रां.द ),डेनियल मुर्मू (ट्राइबल एक्टिविस्ट), दिलीप टुडू (समाज सेवक), बुलाय हांसदा, श्रीतन हेंब्रम, विनय हांसदा, नरेश मरांडी, मैनुअल टुडू, लुखीराम मुर्मू, बुधराम मुर्मू, सुखराम हेंब्रम, कार्नेलियुस मुर्मू, मिठू मुर्मू, इंग्लिश लाल मरांडी, सुनीराम मुर्मू , चंद्र मोहन हांसदा, कार्नेलियूस सोरेन, चंद्रदेव मंडल।

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