हैदराबाद, (तेलंगाना)। विगत दिनों तेलंगाना प्रदेश के हैदराबाद में नेहरू आदिवासी जनजातीय कला भवन में परधान आदिवासी जनजातीय समाज का दो दिवसीय कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। जिसमें अखिल भारतीय राष्ट्रीय परधान जनजाति उत्थान संगठन नई दिल्ली के बैनर तले भारत देश के 11 राज्यों के परधान सगाजन एकत्र हुए और धरती के प्रथम संगीत गुरु हीरा सुका मुठवा लिंगो का जन्म उत्सव (फड़ा विदुरका सेवा गोंगो) मनाया एवं सांस्कृतिक परंपरा के अनुसार गोंगो किया गया। साथ ही उपस्थित सभी महिलाओं का विशेष सम्मान किया गया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय परधान जनजाति उत्थान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुठवापोय दादा के.पी. परधान (मरकाम) जी के मार्ग दर्शन में सेवा गोंगो किया गया l इसके बाद सामाजिक परिचर्चा में कचारगढ़ (कछार गढ़) में आगामी आने वाले समय में प्रत्येक वर्ष के पूस माह की पूर्णिमा को संगीत गुरु हीरा सुका लिंगो का जन्म उत्सव बड़ी धूम धाम से कचारगढ़ (कछार गढ़) में मनाया जाने और प्रत्येक राज्यों में राज्य स्तर, जिला स्तर व तहसील स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर नए नए कपड़े पहने जाए अपने पारम्परिक खाड़ा बाना की पूजा गोगो किया जाए जिस संस्कृति को हम इतिहास में भूल बस नहीं याद कर पाए उसे वापिस धरातल पर अंगीकृत किए जाने के साथ ही करताड गढ़ (कछार गड़) में परधान समाज संगठन का क्या प्रयास होगा वहां पर आदिवासी जनजातियों के साथ मिलकर पहांदी पारी कुपार लिंगो दादा हीरा सुका लिंगो जंगो दाई रायताड़ के जीवनों पर आधारित घटनाओं को समाज के सामने कलम के माध्यम से कैसे जगाया जाए इस पर चर्चा किया गया। चर्चा से पूर्व सभी राज्यों के परधान समाज के वरिष्ठ लोगों का सम्मान हीरा सुका लिंगो पहांदी पारी कुपार लिंगो जंगो दाई रायताड़ के प्रतीक स्मृति चिन्ह अंगोछा साल से स्वागत किया गया, साथ ही संगठन का विस्तार करते हुए राष्ट्रीय स्तर एवं कुछ राज्यों के प्रदेशीय स्तर पर नए लोगों को पदभार दिया गया साथ ही संगठन के प्रति सभी राज्यों से आए लोगों को संगठन की जानकारी दिशा निर्देश की जानकारी दी गई। संगठन के राष्ट्रीय मुठवाल एवं राष्ट्रिय अध्यक्ष के.पी. प्रधान जी ने परधान समाज उत्थान के लिए आगामी रणनीति पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि आने वाला समय स्वर्णिम होगा क्योंकि परधान समाज के लोगों में अब धीरे धीरे जागृति आ रही है अब हमें अपनी भाषा बोली रीति रिवाज सांस्कृतिक पहचान को प्रत्येक समाज के व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास करना चाहिए जिससे जो आदिवासी जनजातीय परधान समाज से दूर हो गया है उनको मुख्य धारा में वापिस लाना है। हमें अपने आस्तित्व को बचाना है अपनी पानाल गोंडी संस्करण पारसी को जीवित रखना है अपने कार्य शिक्षा को बढ़ावा देने में सक्षम बनाना है आज भारत में हम परधान समाज के लोगों का इतिहास मिटाया जा रहा है हम आदमी अनुसूचित जनजाति से आते है लेकिन आज की वर्तमान और पूर्व की सरकारों ने हमें सही संरक्षण नहीं दिया इस पर आगामी रणनीति बनाई गई एवं प्रत्येक वर्ष में जहां - जहां पर परधान समुदाय के लोगों का निवास है वहां पर मिलन समारोह आयोजित किया जाएगा और संस्कृति पहचान भाषा शैली कार्य शैली को तैयार करना होगा।
तेलंगाना प्रदेश के लोगों ने एक कमरे में बैठ कर अपने प्रदेश के लिए नए अध्यक्ष का नाम पारित कर राष्ट्रीय कार्यकारणी को अन्मोदन के लिए दिया। राष्ट्रीय कार्यकारणी ने मंच से तेलांगना राज्य के लोगों द्वारा प्रस्तावित नाम तिरुमल नागेश धुर्वे जी को सर्व सहमति से तेलगाना राज्य का प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत किए जाने की घोषणा की। आगामी रणनीति के तहत समाज को मुख्य धारा के साथ ही सामाजिक रीति रिवाज सांस्कृतिक परंपरा पहचान और भाषा बोली को परधान समाज के प्रत्येक परिवार तक पहुंचने की शपथ लिया गया। इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश , महाराष्ट्र, तेलांगना, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, उड़ीसा , झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़, असम, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों के प्रतिनिधि परधान समाज संगठन के लोग शामिल थे। जिसके मुख्य नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुथवाल तिरुमल के.पी. प्रधान जी, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तिरुमल गणेश प्रधान, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तिरुमल डॉ. प्रदीप गेडाम, राष्ट्रीय महासचिव तिरुमल घोड़ाम लक्ष्मण, राष्ट्रीय सचिव तिरुमल आलोक परस्ते, राष्ट्रीय प्रवक्त तिरुमल धन सिंह भलावी, राष्ट्रीय विधि सलाहकार तिरुमल नरबद मरावी, एवं तेलंगाना प्रदेश से तिरुमल रामकिशन सीडाम, प्रदेश अध्यक्ष तिरुमल धुर्वा नागेश, महिला प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष तिरुमाया सीडाम गिरजा, दिल्ली से तिरुमाया पार्वती कुरसंगे, उड़ीसा से तिरुमल संग्राम वीसी जी, मध्य प्रदेश से तिरुमल जय सिंह धुर्वे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तिरुमल रमेश मसकोले संभाग अध्यक्ष नर्मदापुरम एवं मुठवाल, अशोक भलावी, बसंत धुर्वे, स्वरूप शरण उईके एवं अन्य सभी राज्यों के अखिल भारतीय परधान समाज उत्थान संगठन के लोग शामिल हुए।